भारतीय रेल यात्री आरक्षण पूछताछ

Please help Indian railways and government of India in moving towards a digitized and cashless economy. Eradicate black money.
English
पर्वतीय रेल

शिमला:
गोरखा युद्ध के बाद 1819 मे शिमला अंग्रेज़ों के कब्जे में था। उस समय इसे हिंदू देवी, श्यामला देवी के मंदिर के लिए जाना जाता था। स्कॉटिश सिविल सेवक चार्ल्स केनेडी ने 1822 में इस शहर में पहला ग्रीष्मकालीन शिविर ब्रिटिश के लिए बनाया। बंगाल के गवर्नर जेनरल लार्ड अम्हरट(1823- 1828) ने यहाँ एक ग्रीष्मकालीन शिविर का की स्थापना की थी, तब इस शहर में एक ही झोपड़ी थी। सैन्य अधिकारियों ने कालका- शिमला के संदेहवादी मर्ग को सामरिक रेलवे के लिए चुना
मथेरण:
मथेरण पर्वतीय रेल महाराष्ट्र(भारत) में एक रेल विरासत है. यह 1901- 1907 के बीच अब्दुल हुसैन आदमजी पीरभाय द्वारा बनाया गया उनके पिता सर आदमजी पीरभाय इस के वित्तपोषक थे इस मे कुल लागत Rs.16, 00,000 आया था। अब्दुल हुसैन आदमजी पीरभाय बंबई के एक प्रसिद्ध व्यापारी सर आदमजी पीरभाय के पुत्र थे, जो अक्सर मथेरण का दौरा किया करते थे और यहाँ आसानी से पहुँचने के लिए रेल निर्माण करना चाहते थे। रेलवे के लिए हुसैन की योजना 1900 में तैयार किया गया और निर्माण कार्य 1904 में शुरू किया था. इस लाईन को यातायात के लिए 1907 मे खोला गया था।
दार्जिलिंग:
दार्जिलिंग, दार्जिलिंग जिले का मुख्यालय है, शिवालिक पहाड़ियों में हिमालय की निचली सीमा पर 6982 फीट (2128 मीटर) के एक औसत ऊंचाई पर है। भारत में अंग्रेजी शासन के दौरान यह ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में जाना जाता था, गर्मियों के दौरान ब्रिटेन के निवासियों के लिए यह एक प्रमुख स्थान था। दार्जिलिंग चाय उद्योग के लिए तथा दार्जिलिंग हिमालय रेलवे के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर है। 19 वीं शताब्दी में इस क्षेत्र को चाय बागान के रुप में विकसित किया गया। दार्जिलिंग में कई ब्रिटिश शैली के पब्लिक स्कूल हैं जो भारत और पड़ोसी देशों के कई भागों के छात्रों को आकर्षित करता है।1980 के दशक में एक अलग गोरखालैंड राज्य की मांग के लिए एक प्रमुख केन्द्र रहा था,और फिर एक अलग राज्य के लिए लोकतांत्रिक आंदोलन फिर से शुरू हो गया है।
उटी :
ऊटी नीलगिरी के जीवमंडल रिजर्व में स्थित है। ऊटी समुद्र स्तर से 9080 फीट (2767 मीटर) की एक अनुमानित ऊंचाई पर है। इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने के लिए चारो ओर से वन क्षेत्र तथा जल निकाय है। जीवमंडल रिजर्व के कुछ क्षेत्रों में पर्यटन के विकास के लिए है और कुछ आगंतुकों के लिए निर्धारित किया गया है, इन क्षेत्रों को पर्यटकों के लिए खोलने तथा साथ ही इस क्षेत्र के संरक्षण के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। आमतौर पर पर्यटकों और किसी भी स्थानीय लोगों को निरीक्षण करने के लिए आरक्षित वनों में प्रवेश करने की अनुमति नही है। ऊटी का ज्यादातर भाग पहले से ही अनियंत्रित व्यावसायीकरण के कारण क्षतिग्रस्त कर दिया गया है।